Saturday, October 31, 2009
Tuesday, October 27, 2009
Tuesday, October 20, 2009
Monday, October 19, 2009
चारा गर आए कई गम ख्वार भी आए !
बीमार से मिलने कोई बीमार भी आए !
मिलजाएँ तो फिर इश्क़ में क्या लुत्फ रहेगा ?
बेहतर है कोई बीच में दीवार भी आए !
मुहब्बत का मज़ा महदूद न हाँ में है न ना में है
कभी इक़रार भी आए कभी इनकार भी आए !
दहल उठ ते हैं मासूम दिल जिनके धमाकों से !
कभी उन ज़ालिमों पे तेरी गेबी मार भी आए !
हमें जो देसके अमन-ओ- सुकून की ज़िंदगी" घायल" !
कभी इस देश में एसी कोई सरकार भी आए !
2
दूरियाँ हो बाक़ी न फासला दिखाई दे !
तुझ में भी रंग मेरे जेसा दिखाई दे !
अपनी अपनी नज़र है जिसको जो दिखाई दे !
दरिया क़तरा किसीको क़तरा दरिया दिखाई दे !
राह है तो फिर मंज़िल ज़रूर होगी!
चलते चलो जहाँ तक रास्ता दिखाई दे!
तुम्हारी आंखो पे पढ़ चुका है परदा फरेब का !
मैं क्या दिखाना चाहूँ तुम्हें क्या दिखाई दे !
ये भी मुमकिन है कुछ भी मुमकिन न हो "घायल" !
पर आप में भी तो कुछ हौसला दिखाई दे !
३
ईमान बेचने वाले जिहाद का एलान करते हैं !
नादाँ हैं दुनियाँ आखिरत दोनो का नुकसान करते हैं !
ये रहनुमा किसी बा हुनर ताजिर से कम नहीं हैं !
अपने ही फायदे का जारी हर फरमान करते हैं
हर बार वही बनते हैं मुखिया हमारे गॅव के !
जो हंसती खेलती बस्तियाँ वीरान करते हैं
हर छोटी बढ़ी ख्वाहिश तर्क की जिन के लिए !
वही बच्चे माँ बाप पर अहसान करते हैं !
क़ताअत=
तेरा किरदार ही आईना है तेरी ज़िंदगी का!
क्या बनाता बिगड़ता है कोई किसी का!
पैदा हुआ बड़ा हुआ फिरकों में बँट गया,
बस इतना ही सफर तय हुआ मुश्किल से आदमी का!
२
यूँ घड़ी-घड़ी हर बात की शिकायत नही करते!
तुम भी तो अपने उसूलों की हिफ़ाज़त नही करते!
पबन्दिये तहज़ीब में दम घुटता है नन्हे फरिश्तों का!
वहाँ रहमतें नही बरसती जहाँ बच्चे शरारत नहीं करते!
बीमार से मिलने कोई बीमार भी आए !
मिलजाएँ तो फिर इश्क़ में क्या लुत्फ रहेगा ?
बेहतर है कोई बीच में दीवार भी आए !
मुहब्बत का मज़ा महदूद न हाँ में है न ना में है
कभी इक़रार भी आए कभी इनकार भी आए !
दहल उठ ते हैं मासूम दिल जिनके धमाकों से !
कभी उन ज़ालिमों पे तेरी गेबी मार भी आए !
हमें जो देसके अमन-ओ- सुकून की ज़िंदगी" घायल" !
कभी इस देश में एसी कोई सरकार भी आए !
2
दूरियाँ हो बाक़ी न फासला दिखाई दे !
तुझ में भी रंग मेरे जेसा दिखाई दे !
अपनी अपनी नज़र है जिसको जो दिखाई दे !
दरिया क़तरा किसीको क़तरा दरिया दिखाई दे !
राह है तो फिर मंज़िल ज़रूर होगी!
चलते चलो जहाँ तक रास्ता दिखाई दे!
तुम्हारी आंखो पे पढ़ चुका है परदा फरेब का !
मैं क्या दिखाना चाहूँ तुम्हें क्या दिखाई दे !
ये भी मुमकिन है कुछ भी मुमकिन न हो "घायल" !
पर आप में भी तो कुछ हौसला दिखाई दे !
३
ईमान बेचने वाले जिहाद का एलान करते हैं !
नादाँ हैं दुनियाँ आखिरत दोनो का नुकसान करते हैं !
ये रहनुमा किसी बा हुनर ताजिर से कम नहीं हैं !
अपने ही फायदे का जारी हर फरमान करते हैं
हर बार वही बनते हैं मुखिया हमारे गॅव के !
जो हंसती खेलती बस्तियाँ वीरान करते हैं
हर छोटी बढ़ी ख्वाहिश तर्क की जिन के लिए !
वही बच्चे माँ बाप पर अहसान करते हैं !
क़ताअत=
तेरा किरदार ही आईना है तेरी ज़िंदगी का!
क्या बनाता बिगड़ता है कोई किसी का!
पैदा हुआ बड़ा हुआ फिरकों में बँट गया,
बस इतना ही सफर तय हुआ मुश्किल से आदमी का!
२
यूँ घड़ी-घड़ी हर बात की शिकायत नही करते!
तुम भी तो अपने उसूलों की हिफ़ाज़त नही करते!
पबन्दिये तहज़ीब में दम घुटता है नन्हे फरिश्तों का!
वहाँ रहमतें नही बरसती जहाँ बच्चे शरारत नहीं करते!
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