Monday, November 23, 2009

दर्द उठता है मज़ा देता है !

ये भी नेमत है खुदा देता है !!

ज्यों ही लिखता हूँ तेरा नाम मुक़द्दर में !

कोई आके लकीरों को मिटा देता है !!

कभी तेरी यादें चैन से रहने नहीं देतीं !

कभी तेरा ख्याल चुपके से सुला देता है !!

मुझसे ज़्यादा मुझे जानता है वो !

हर कदम पर मुझे मेरा पता देता है !!

इस्लाह पसंद नहीं शायद उसको !

इसीलिए हर बात पे तूफान उठा देता है !!

ग़मे उल्फत, दर्द, बेक़रारी, बेचेनी !

देने वाला देता है तो क्या -क्या देता है !!

दोनों ही करते हैं काम अपना बराबर !

मैं बुझाता हूँ शरारे वो हवा देता है !

मैं मसीहा कहूँ उसको या कुछ और "घायल"

दर्द यूँ देता है कि लगता है दवा देता है !!

(२)

साथ रहता है पर दिखाई नहीं देता !

तेरा अहसास दिल को रिहाई नहीं देता !!

सुनने वाले ही सुन सुन पाते हैं सदाए दिल !

राजे उल्फत सभी को सुनाई नहीं देता !!

तड़पता रहे रोता रहे किसी भी हाल में हो !

ये वुस आते दिल ही है जो दुहाई नहीं देता !!